August 20, 2022
रूस-यूक्रेन की जंग में लुहांस्क में निर्णायक स्तर पर पहुंची लड़ाई, जानिये क्या है रूस की रणनीति

[ad_1]

रूस और यूक्रेन के बीच 50वें दिन भी जंग जारी है. इस बीच डोनेत्सक की तरह लुहांस्क ने भी यूक्रेन से अलग देश की घोषणा कर दी है. एबीपी न्यूज की टीम एक्सक्लूसिव वॉर रिपोर्टिंग कर रही है. एबीपी न्यूज से खास बातचीत में लुहांस्क के नए राष्ट्रपति लियोनिद पोसेचनिक ने कहा है कि यूक्रेन की फासीवादी सेना को पूरी तरह से खदेड़ कर ही रूस समर्थित लुहांस्क की मिलेशिया दम लेगी.

लुहांस्क में रूसी सेना शहर के बाहर नहर के किनारे एक बड़े से प्लांट की चारदीवारी के करीब एक खास रोबोट-व्हीकल के जरिए धीरे-धीरे कर घास में छिपाई गई लैंड माइन को ढूंढ कर उसमें ब्लॉस्ट करती है. किसी इंसान का इस लैंड माइन में पैर पड़ने पर उसके कई चीथड़े आसमान में उड़ सकते थे.

लेकिन इस माइन-स्वीपर रोबोट ने रूसी सेना और रूस समर्थित लुहांस्क मिलेशिया का काम आसान कर दिया है. दरअसल रूस यूक्रेन के बीच चल रही जंग में एबीपी न्यूज की टीम लुहांस्क पहुंच गई है और जो कुछ एबीपी न्यूज की टीम ने देखा वो अर्बन-वॉरफेयर का हिस्सा है.

यूक्रेन के डॉनबास का हिस्सा था लुहांस्क 

लुहांस्क भी दोनेत्सक की तरह यूक्रेन के डॉनबास प्रांत का हिस्सा था. लेकिन यूक्रेन के खिलाफ जंग शुरु होते ही रूस के राष्ट्रपति, पुतिन ने लुहांस्क और दोनेत्सक दोनों को ही अलग-अलग आजाद देश घोषित कर दिया था. लुहांस्क के करीब 80-90 प्रतिशत हिस्से पर अब रूस समर्थित लुहांस्क मिलेशिया का कब्जा है.

लुहांस्क में अब रूस समर्थित नई सरकार भी में बन गई है. जि‌सके प्रमुख यानि राष्ट्रपति हैं. लेकिन यूक्रेन से सटे लुहांस्क में अब निर्णायक जंग रह गई है. क्योंकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की भी मान चुके हैं कि अब डॉनबास (यानि दोनेत्सक और लुहांस्क) को अब वापस यूक्रेन में मिलाना नामुमकिन है और अगर ऐसा करने की कोशिश की गई तो तीसरा विश्वयुद्ध हो सकता है.

अंतरराष्ट्रीय मीडिया से मिलने पहुंचे लुंहास्क के नये राष्ट्रपति 

लुहांस्क शहर से करीब दस (10) किलोमीटर दूर एक बिजली प्लांट में लुहांस्क के नए राष्ट्रपति अंतर्राष्ट्रीय मीडिया से मुखातिब होने आए हैं. एबीपी न्यूज सहित देश-विदेश की मीडिया के सामने उन्होनें खुलासा किया कि वे यहां इसलिए मिलने के लिए आए हैं क्योंकि इस हाईडिल प्लांट को हाल ही में यूक्रेनी सेना के कब्जे से आजाद कराया गया है.

लुहांस्क के राष्ट्रपति का आरोप है कि जब तक ये प्लांट यूक्रेन की सेना के कब्जे में था तब तक यूक्रेन ने लुहांस्क को एक बड़े इलाके की बिजली काट रखी थी. ये इसलिए क्योंकि यहां के लोग यूक्रेन से आजादी चाहते थे. लेकिन इस प्लांट के लिए रूसी सेना और लुहांस्क मिलेशिया यानि विद्रोही-गुट ने यूक्रेन के सैनिकों के खिलाफ जंग कर यहां से खदेड़ दिया.

रूस और यूक्रेन में 50 दिन से चल रहा है युद्ध

दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच जो 50 दिन से युद्ध चल रहा है, वो मुख्यत: ‘अर्बन-वॉरफेयर’ यानी शहरों में लड़ी जाने वाली जंग है. इस लड़ाई में शहर के ‘वाइटल इंस्टॉलेशन’ यानि वे महत्वपूर्ण बिल्डिंग और संयंत्र हैं जिसपर आम शहरी निर्भर रहते हैं. इनमें हाईडिल-प्लांट, वॉटर सप्लाई और सड़कों और हाईवे के टैक्टिकल चैक-पोस्ट और नाके शामिल हैं. लुहांस्क का ये हाईडिल प्लांट इसीलिए रूस और यूक्रेन दोनों के लिए बेहद जरुरी था.

रूस ने उतारी अपनी रिमोटलेस माइन स्वीपर

लेकिन लुहांस्क मिलेशिया यानि विद्रोही-गुट की मानें तो यूक्रेन की सेना ने यहां से भागने से पहले शहर के अलग-अलग हिस्सों में लैंड-माइंस बिछा दी थी. ताकि लुहांस्क के नागरिक और सैनिक इन बारुदी सुरंगों पर पैर रखें और वहीं ढेर हो जाएं. यही वजह है कि रूसी ‌सेना अपने खास अनमैन्ड यानि मानवरहित लैंड-यूएवी  की मदद से इन इलाकों को सुरक्षित बनाने में जुटी है. इस खास रोबोट को रिमोटलैस माइन-स्वीपर भी कहा जाता है.

यूक्रेन ने जमीन के नीचे दबा रखीं हैं कई लैंड माइन्स

रूसी सेना के सैपर्स यानि इंजीनियर्स ने अपने माइन-स्वीपर व्हीकल की मदद से हमारे कैमरे के सामने ही एक लैंड माइन को डिफ्यूज यानि निष्कृय कर दिया. लेकिन सैपर को अभी भी शक था कि यहां जमीन में और बारुदी-सुरंग दबी हो सकती हैं. इसीलिए, वो खुद खास बॉडी-गियर पहनकर अपने इंस्ट्रूमेंट लेकर छानबीन करने लगा. कुछ ही देर में उसे जमीन के काफी नीचे एक लैंड-माइन पता लगी जो माइन-स्वीपर व्हीकल भी नहीं ढूंढ पाई थी. सैपर ने लैंड माइन को एक खास तरह के ‘कनटेंड ब्लास्ट’ कर डिफ्यूज कर दिया.

भयंकर होता जा रहा है युद्ध

जैसे-जैसे रूस और यूक्रेन के बीच जंग निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है, युद्ध और भयंकर हो रहा है. दोनेत्सक हो या मारियूपोल या फिर लुहांस्क दोनों ही देश एड़ी-चोट का जोर लगाकर एक दूसरे को पटकनी देने में जुटे हैं. जहां, रूस समर्थित दोनेत्सक और लुहांस्क यूक्रेन से अपने-अपने पूरे इलाके को आजाद कराने चाहते हैं, यूक्रेन की कोशिश है कि इन दोनों नए देशों के जितने इलाकों पर अपना कब्जा जमाए रखे उतना बेहतर है क्योंकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की दोनेत्सक और लुहांस्क को लेकर अपने हथियार लगभग डाल चुके हैं.

रूस यूक्रेन युद्ध कई गरीब देशों की अर्थव्यवस्था के लिए कर रहा है तबाही का खतरा पैदा: संयुक्त राष्ट्र

JNU Ram Navami Clash: ‘एबीवीपी का दावा पूरी तरह गलत, जेएनयू प्रशासन वापस ले बयान’, जानें मेस-हॉस्टल कमिटी ने क्या कहा

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.